
-पब्लिक में चर्चा
-विधानसभा क्षेत्र बैरिया के नेतृत्व का जिम्मा सौंपा पार्टी ने, खुद बलिया नगर को लिया चुन

शशिकांत ओझा
बलिया : भारतीय जनता पार्टी के अनुशासन और नियमों की चर्चा सभी करते हैं। पार्टी के लगभग सभी नेता इसे मानते ही हैं पर बागी के नाम से विख्यात बलिया जनपद के एक वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल पार्टी के नियम कानून को ही शायद चुनौती दे रहे हैं। बलिया पब्लिक में इस बात की बड़ी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव 2027 आते आते यह तय होगा कि नेताजी बड़े हैं या पार्टी।

पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल राजनीति में छात्र जीवन से ही हैं। सतीश चंद्र कालेज छात्रसंघ में बतौर अध्यक्ष सेवा देने के बाद वह सक्रिय राजनीति में आए। भाजपा संगठन की सेवा भी उन्होंने बहुत मनोयोग से किया। पार्टी और समाज की सेवा के लिए उन्होंने विवाह भी नहीं किया। बलिया नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने उन्हें 2017 में विधानसभा का टिकट भी दिया और वह चुनाव जीत भी गए। पहली बार विधायक बनने के साथ ही उन्हें योगी आदित्यनाथ की सरकार में राज्य मंत्री बनने का भी मौका मिला। आनंद स्वरूप शुक्ल को भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वर्तमान में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव का अति करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें विधानसभा क्षेत्र बैरिया का नेतृत्व करने के लिए निर्देशित किया और उन्हें वहां का टिकट भी दिया। सरकार में मंत्री रहते हुए चुनाव लड़े और हार गए।

चुनाव में आनंद स्वरूप शुक्ल को हार मिली। चुनाव हारने के बाद पूर्व मंत्री ने बैरिया से दूरी बना ली और लगभग संबंध विच्छेद कर लिया। सोशल मीडिया पर बैरिया का त्याग करने की बात कह वह फिर से बलिया नगर विधानसभा क्षेत्र में ही जुट गए। ऐसे में पब्लिक में इस बात की बड़ी चर्चा है कि क्या भाजपा बड़ी है या आनंद स्वरूप शुक्ल। चुनाव में क्या होगा यह तो समय बताएगा पर राजनीति को जानते वाली गुमनाम शक्तियों को यह कहते सुना जा रहा है कि पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल का हाल धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का वाली ही होगी।






