

-बेरुआरबारी की रामकथा
-अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने प्रेम त्याग और धर्म का सुनाया अनुपम संदेश
-विधायक केतकी सिंह के नेतृत्व में चल रहे आयोजन में हजारों हो रहे लाभान्वित

शशिकांत ओझा
बलिया : बेरुआरबारी क्षेत्र स्थित बाबा अमरनाथ करिहरा मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के सातवे दिन रविवार को अंतरराष्ट्रीय कथावाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन के पश्चात हुए भरत-राम मिलन के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग का ऐसा सजीव वर्णन किया कि कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं, जबकि पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंजता रहा।


राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन का प्रत्येक प्रसंग मानव समाज को सत्य, त्याग, प्रेम और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है। उन्होंने केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस प्रकार केवट ने प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराकर अपनी निष्काम भक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया, उसी प्रकार चित्रकूट में भरत और श्रीराम का मिलन भारतीय संस्कृति में भाईचारे, समर्पण और धर्मपालन की सर्वोच्च मिसाल है। उन्होंने बताया कि जब भरत को अयोध्या लौटने पर पिता महाराज दशरथ के निधन और भगवान श्रीराम के वनवास का समाचार मिला, तो वे शोक और ग्लानि से व्याकुल हो उठे। उन्होंने स्वयं को इस परिस्थिति के लिए उत्तरदायी मानते हुए राजगद्दी स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ, माताओं, मंत्रियों तथा अयोध्या के नागरिकों के साथ चित्रकूट पहुंचकर भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने की विनम्र प्रार्थना की। कथावाचक ने कहा कि चित्रकूट में दोनों भाइयों का मिलन इतना करुण और भावुक था कि वहां उपस्थित ऋषि-मुनि, देवगण और समस्त जनसमूह की आंखें नम हो गईं।


भरत ने बार-बार भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजसिंहासन संभालने का आग्रह किया, लेकिन श्रीराम ने पिता महाराज दशरथ के वचन और रघुकुल की मर्यादा का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करने का अपना संकल्प दोहराया। राजन जी महाराज ने आगे कहा कि अंततः भरत भगवान श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटे और उन्हें ही राजसिंहासन पर विराजमान कर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी के समान कठोर एवं सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत किया। उन्होंने स्वयं को राजा नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम का सेवक और प्रतिनिधि मानते हुए राज्य का संचालन किया। भरत का त्याग, निष्कलंक प्रेम और समर्पण आज भी समाज के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत है। कथा के समापन पर पूरा कथा पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष और भक्ति रस से सराबोर हो उठा। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा धर्म, मर्यादा और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम मे मुख्य रूप से विधायक केतकी सिंह, व्यस्थापक राकेश सिंह, कुंवर राकेश सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष एनएस सिटी प्रयागराज, शशि प्रकाश पांडेय, रोहित सांकृत्यायन वाराणसी, डॉ अभिषेक सिंह,विश्राम सिंह, शांत स्वरूप सिंह, नन्हकू सिंह, लाखन सिंह, केडी सिंह आदि लोग रहे।



