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विधानसभा क्षेत्र फेफना (पूर्व में कोपाचीट) का है अनोखा राजनीतिक इतिहास

-राजनीतिक चर्चा
-जो भी निर्वाचित विधायक जब हार गया चुनाव, नहीं पहुंचा दोबारा सदन में
-पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी और पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी लगे हैं मिथक तोड़ने में

शशिकांत ओझा

बलिया : विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आ गया है। ऐसे में राजनीतिक चर्चाओं का दौर लगभग शुरू हो गया है। राजनीतिक चर्चा में ही विधानसभा क्षेत्र फेफना (पूर्व में कोपाचीट) का भी अनोखा इतिहास रहा है। फेफना विधानसभा में जो भी निर्वाचित सदस्य चुनाव हार गया वह दोबारा सदन में पहुंच नहीं पाया। विधानसभा का लगातार सफर भले ही गौरी भईया और अंबिका चौधरी का लंबा रहा पर जब यहां भी ब्रेक लगा अब तक लगा ही है। हालांकि पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी और पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी इस मिथक को छोड़ने के लिए अभी मनोयोग से जुटे हैं। विधानसभा चुनाव 2027 में देखना रोचक है क्या होता है।


कोपाचीट विधानसभा क्षेत्र जो बाल में 360 फेफना बन गया वहां शुरू से अब तक जो भी निर्वाचित हुआ सफल चला तो चलता रहा पर जब वह चुनाव हार गए दोबारा सदन में नहीं जा पाए। कोपाचीट से राम नगीना सिंह, कैलाश सिंह सहित कई लोग पहले विधायक हुए। 1977 में गौरी भईया विधायक बने उनका सफर 1991 तक लगातार चला वह एक बार मंत्री भी रहे। 1991 में सुधीर राय विधायक बने। 1992 में अंबिका चौधरी विधायक बने और उनका सफर भी 2012 तक लगातार चला वह प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। 2012 में उपेंद्र तिवारी विधायक बने उनका सफर भी लगातार 2022 तक चला। 2022 में संग्राम सिंह यादव विधायक बने और अभी बने हैं। विधानसभा चुनाव 2027 में क्या होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है पर चर्चा है। परंतु अंबिका चौधरी और उपेंद्र तिवारी इस मिथक को तोड़ने में जुटे हैं। यदि दोनों को मौका मिलता है और वह चुनाव जीत जाते हैं तो फेफना का यह मिथक भी टूट जाएगा।

क्षेत्र में मिथक का अपवाद भी रहे हैं पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी विधायक फेफना में अपवाद भी रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव हारने के बाद वह सदन में तो नहीं गए पर बतौर मंत्री उन्होंने विधानसभा 2007 का चुनाव लड़ा और जीता भी। फेफना विधानसभा में मंत्री पद पर रहने के बाद चुनाव जीतने का कीर्तिमान अंबिका चौधरी के नाम है। राम नगीना सिंह, गौरी भईया और उपेंद्र तिवारी मंत्री पद मिलने के बाद वाला चुनाव ही हार गए। अंबिका चौधरी 2002 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव कैबिनेट के राजस्व मंत्री रहे और 2007 का विधानसभा चुनाव जीते। हालांकि इस सरकार दूसरे दल की बनी इसलिए उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा। मंत्री बनने के बाद चुनाव जीतने का रिकॉर्ड उनके पास है जो वर्तमान मिथक तोड़ने का सोपान चढ़ने का प्रयास कर रहे उपेंद्र तिवारी के पास नहीं।

चार लोग यहां से सरकार में रहे हैं मंत्री भी

विधानसभा फेफना (पूर्व में कोपाचीट) के चार विधायकों को अपने अपने समय प्रदेश सरकार में मंत्री बनने का मौका भी मिला है। राम नगीना सिंह, गौरी भईया, अंबिका चौधरी और उपेंद्र तिवारी। लोग अक्सर यही चर्चा करते हैं जो मंत्री बना और हार गया दोबारा सदन में नहीं जा पाया पर यथार्थ है जो विधायक चुनाव हारा सदन में नहीं पहुंच पाया।

मिथक तोड़ने में जुटे हैं अंबिका चौधरी और उपेंद्र तिवारी

देखना यह है कि क्या यह मिथक 2027 में टूटेगा कि यह मिथक स्थाई रह जाएगा। पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी और उपेंद्र तिवारी इस मिथक को तोड़ने में जुटे हैं। यदि दोनों को मौका मिलता है और वह चुनाव जीत जाते हैं तो फेफना का यह मिथक भी टूट जाएगा।