
-शैक्षणिक गतिविधि
-विद्यालय के लगभग डेढ़ दर्जन शिक्षक हुए शामिल

शशिकांत ओझा
बलिया : सनबीम स्कूल बलिया के प्रांगण में शनिवार को शिक्षकों के लिए ‘फाइनेंशियल और फ़ूड लिटरेसी’ (वित्तीय एवं खाद्य साक्षरता) विषय पर एक महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। ‘गुड स्कूल्स एलायंस’ के तत्वावधान में आयोजित इस सत्र का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को जागरूक बनाना और समाज में स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्य आदतों को बढ़ावा देना था। इस विशेष सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अमृता बर्मन (डायरेक्टर, सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस) उपस्थित रहीं।
बता दे कि श्रीमती बर्मन सनबीम स्कूल बलिया के दो दिवसीय शैक्षिक भ्रमण पर आई हुई थी। उनके साथ ही सनबीम स्कूल की क्वालिटी कंट्रोल टीम के एडिशनल डायरेक्टर पीवी पॉल भी कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिन्होंने शिक्षा की




गुणवत्ता और व्यावहारिक साक्षरता के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन तथा विद्यार्थियों की नृत्य प्रस्तुति से हुई। कार्यशाला को देश के दो जाने-माने विषय विशेषज्ञों में क्रमशः . आशाराम त्रिपाठी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) वाराणसी के कॉमर्स विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं डीन ने वित्तीय साक्षरता पर तथा सुश्री प्रीति भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की असिस्टेंट डायरेक्टर (टेक्निकल) द्वारा संचालित किया गया। उन्होंने सुरक्षित भोजन की आदतों और खाद्य पदार्थों की पहचान करने के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया। इस वृहद प्रशिक्षण सत्र में मेजबान सनबीम स्कूल बलिया के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के 16 अन्य प्रमुख स्कूलों के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्कूलों में प्रमुख रूप सनबीम ग्रुप के स्कूल: सनबीम लहरतारा, सनबीम भगवानपुर, सनबीम इंद्रानगर, सनबीम वरुणा, सनबीम इंटरनेशनल वरुणा, सनबीम सनसिटी, सनबीम सारनाथ, सनबीम मुगलसराय और सनबीम अन्नपूर्णा सनबीम मऊ, सनबीम देवरिया और सनबीम गाजीपुर आदि शिक्षण संस्थानों के शिक्षक तथा बलिया व अन्य क्षेत्रों के स्कूल क्रमशः शेमुषी, जवाहर नवोदय विद्यालय, सेठ एमआर जयपुरिया मऊ के शिक्षक इस कार्यशाला के हिस्सा बने।



सत्र के दौरान एफएसएसएआई की गाइडलाइंस के हवाले से बताया गया कि खाद्य साक्षरता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है ताकि: भोजन के पैकेट पर लिखे न्यूट्रिशन लेबल को सही तरीके से समझा जा सके। मिलावटी और असुरक्षित भोजन की पहचान की जा सके। सोशल मीडिया पर भोजन को लेकर फैलाई जाने वाली भ्रामक खबरों व अफवाहों से बचा जा सके। छात्र-छात्राओं और परिवारों में स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जा सकें। कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रबंधन द्वारा सभी अतिथियों और विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस कार्यशाला को आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया गया।


