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सुरहा ताल जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा

-रामसर साइट घोषित
-अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करेगा बलिया का सुरहा ताल
-अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास स्थल है यह पक्षी विहार
-उत्तर प्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड विकसित कर रहा है पर्यटक सुविधाएं
-अब स्थानीय लोगों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा यह सुरहा ताल

शशिकांत ओझा

बलिया : उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में स्थित सुरहा ताल के नाम से विख्यात जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार को रामसर साइट घोषित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से जहां इसे वैश्विक पहचान प्राप्त होगी वहीं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का सपना पूरा होगा।

इस पहल के बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। जानकारी मिलने ही बलिया के निवासी फूले नहीं समा रहे हैं। स्थानीय लोगों की आय बढ़ने की भी सम्भावना है। पर्यटकों की सुविधाओं के विकास के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड निरंतर प्रयासरत है और इसका विकास कर रहा है। सुरहा ताल के समीप विभिन्न पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि यहां आने वाले आगंतुक एक यादगार अनुभव प्राप्त कर सकें।

ओपन एयर थिएटर से लेकर अनेक सुविधाएं

उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा बलिया जनपद के सुरहा ताल के निकट स्थित मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत ओपन एयर थिएटर, पाथवे, हॉर्टिकल्चर कार्य, साइनेज, चिल्ड्रेन एरिया, मल्टीपर्पज हॉल, घाट विकास, बर्ड वाचिंग टावर, कियोस्क, इंटरप्रिटेशन गैलरी, बेंच तथा अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

यहां प्रवासी पक्षियों का बसेरा

सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।

फरवरी से अब तक प्रदेश को मिलीं तीन रामसर साइट्स

इस वर्ष फरवरी से अब तक उत्तर प्रदेश की तीन आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। फरवरी में एटा स्थित पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ स्थित शेखा पक्षी विहार तथा अब सुरहा ताल को रामसर स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है।

वर्ष 1971 में हुई थी शुरुआत

रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं उनके सतत उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान कर उन्हें रामसर साइट के रूप में नामित करना तथा उनके संरक्षण और प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना है।