
शशिकांत ओझा
बलिया : बड़े ही श्रद्धा और उत्साह से शनिवार की सुबह सुहागिन हिन्दू महिलाओं ने वट सावित्री पूजा किया। बहुतों ने व्रत भी रखा। सुबह सुबह कुछ महिलाओं ने गंगा नदी में डुबकी लगाता। कुछ महिलाओं ने तो घर में ही स्नान कर अपना श्रृंगार किया और सज-धज कर अपने नजदीकी वट वृक्ष के नीचे पहुंचीं। वहां विधि विधान से वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना किया और वट वृक्ष की तना में धागा लपेटा।





शेर-ए-बलिया कहे जाने वाले बलिया के प्रथम कलेक्टर सेनानी चित्तू पांडेय के गांव रट्टूचक वैना में नेशनल हाईवे 31 के किनारे स्थित वट वृक्ष में महिलाओं की खासी भीड़ दिखी।
वट सावित्री की पूजा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अपने अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं। वट (बरगद) के पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इस पेड़ की आयु बहुत लंबी होती है, जो अटूट सुहाग और अमरता का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस छीन कर लाया गया था। उनकी निष्ठा और प्रेम के प्रतीक के रूप में यह व्रत मनाया जाता है। बरगद की लंबी उम्र के कारण वट और यमराज से अपने पति को लाने वाली सावित्री के प्रति श्रद्धा स्वरूप इस व्रत को वट सावित्री व्रत का नाम दिया गया है और आधुनिक युग की महिलाएं भी इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से करती हैं।


